श्री गुरु ग्लोबल टाइम :-मुख्यमंत्री स्वैच्छिक अनुदान राशि 33.50लाख गरियाबंद
सर्वोपरि क्या आपका संगठन पैसे पर चलता है सरकारी पैसे पर चलता है, पार्टी अगर सत्ता में रहती है तो ठेका अपने निजी अपने समर्थक लोगों को देती है या तो खैर कांग्रेस में भी परंपरा चलते आ रहा था अब आर्थिक अनुदान भी अपने लोगों को दे रही है यह राजनीति के लिए गंभीर है।वैसा ही क्या आने वाला समय में होता रहेगा । और वापस करने वाले में कितने लोग शामिल होंगे सरकारी ट्रेजरी में पैसा डालने वाले कितने लोग शामिल होंगे वह देखने लायक होगा। जिसमें नगर पंचायत अध्यक्ष सरपंच बूथ अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष संगठन में पद दिया पूर्व के बीजेपी से जुड़े हुए लीडर एवं इसमें कुछ मीडिया से जुड़े हुए लोगों को मिला है। जिसने आर्थिक सहायता का सूची तैयार किया होगा उसने पार्टी को तोड़ने का काम कर ही रहा है एवं कुछ मीडिया जुड़े लोगों को देकर के आधे को नहीं देकर के मीडिया में भी अपना विरोधी और समर्थक तैयार कर लिया है। जब आर्थिक सहायता बड़े-बड़े रहिस लोगों को मिल सकता है तो भाई मीडिया लोगों को सभी लोगों को मिलना चाहिए था क्योंकि जन सेवा एवं समाज के लिए सूचना पहुंचाने का काम करते हैं ।पूर्व में कांग्रेस सरकार में भी कांग्रेस से जुड़े हुए लोगों को ऐसा लाभ अनुदान राशि मिलता था। लेकिन वर्तमान सूची को देखें तो इतना ज्यादा कमियां नहीं रहता था जरूरतमंद इसमें नहीं के बराबर है। मतलब इसमें सब आत्मनिर्भर लोग हैं बीजेपी में ऐसे भी समर्थक हैं जो कमजोर वर्ग से हैं मजदूर वर्ग से हैं लेकिन उनको यह राशि मिलना चाहिए था लेकिन नहीं मिला सूची में कई ऐसे लोग हैं जिनको ऐसे अनुदान राशि बार-बार मिल रहा है। अगर बीजेपी में ऐसे लोग हैं जिसको कभी नहीं मिला है उन लोगों को पार्टी के खिलाफ नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही है। ऐसे होने के कारण पार्टी और संगठन में टूट हो सकती है। जिसको 10000 मिला है 5000 मिला है वही पार्टी के लिए काम करें। हमको तो कुछ नहीं मिलता है हम क्यों वोट मांगने जाए क्यों आपका समर्थन करें ऐसी हो जाएगी।और इस सूची को सार्वजनिक किसने किया है। यह सबसे बड़ा सवाल है । जिस लाभार्थी को लाभ मिला है क्या सभी ने आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कहीं लगाया था। उनका आवेदन किस प्रकार था किस प्रकार मांग किए थे और उनको मिल गया। मांग के अनुसार क्या 10% लोगों का आवेदन सोशल मीडिया में सार्वजनिक हो सकता है। यह सबसे बड़ा सवाल है। भारतीय जनता पार्टी सरकार हमेशा अनुशासन की बात करती है क्या ऐसे लोगों को सहायता राशि जारी करके पार्टी और संगठन के लोगों को एक दूसरे में मतभेद मनभेद की भावना उत्पन्न होगी। क्योंकि लोकतंत्र में प्रत्येक आदमी को एक वोट का अधिकार रहे रहता है चाहे वह करोड़पति हो या एक कमजोर मजदूर किसान सभी बराबर अधिकार रखते हैं। पार्टी और संगठन में बात करें एक छोटा कार्यकर्ता का जितना योगदान होता है वह मंडल एवं पन्ना प्रमुख एवं जिला एवं प्रदेश लेवल के कार्यकर्ता का भी उतना ही योगदान संगठन में माना जाता सकता है। राजनीति एक सेवा की भावना होती है जिसको सेवा करना है वही राजनीति में रहता है अगर ऐसी राजनीति में लोगों को पैसा देंगे तो राजनीति पैसा तंत्र हो जाएगी आने वाला समय में बिना पैसा के आपका पार्टी के के लिए कोई काम करने वाला नहीं होगा या भारतीय जनता पार्टी और सरकार को सोचना चाहिए। आने वाला समय में कोई किसी और की सरकार बनती है ऐसे ही लोगों को आर्थिक सहायता देंगे तो पार्टी से जुड़े हुए लोगों को देंगे तो पार्टी टूट सकती है। अन्य राजनीतिक पार्टी के लिए यह सोचने के लिए बहुत गंभीर विषय है ।क्योंकि सभी लोगों को तो दे नहीं सकते। ऐसा आर्थिक सहायता जिसमें अपने लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं ऐसा व्यवस्था समाप्त कर देना चाहिए। अंतिम पंक्ति में अपना एक डायलॉग याद आ गया मांगो उसी से जो दे खुशी से और ना कहे किसी से आपने तो पूरा सूची ही सार्वजनिक करके जिनको दिया है उनको ही बेइज्जत कर दिए। कहने का मतलब चुपके से दे देते और कहते हैं मूंगफली में दाना नहीं है किसी को बताना नहीं है।
