श्री गुरु ग्लोबल टाइम:-वर्तमान भारत की सरकार ने मीडिया को लोकतांत्रिक संवैधानिक संस्थाओं को बड़े-बड़े नौकरशाह को, यहां तक की भारत की न्यायपालिका को अपने हिसाब से नियंत्रित करके कंट्रोल करके सिस्टम चलाने का नतीजा भुगत रहा है। जो इस सरकार को आलोचना कर रहा है, सवाल उठा रहा है उन पर कानूनी कार्रवाई कर दो देशद्रोह के मुकदमे चला दो, कानून और दुरुपयोग करके उनके पुराने मामले को खोल करके उसको जेल में डाल दो। इसलिए इस सरकार बिल्कुल कोई आलोचना करने वाला नहीं है और यह सरकार अपने मनमानी तरीके से काम कर रही है उसका नतीजा देश की जनता भुगत रहा है। जब इनको देश की जनता ने विश्वास करके इनको सत्ता दिया था तब $1 एक डांलर60 ₹का करीब था,, आज की स्थिति में₹96 पहुंच गया है, और ऐसा ही रहा तो ₹100 के आंकड़े भी पार कर सकता है,, और बिल्कुल पार करेगा क्योंकि इनके पास ना दूर दृष्टि है और इन सरकार के पास ना गरिमा बची है ना नैतिकता बची है। उनके मंत्री भी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं, अब तक भारत के इतिहास में कई मंत्री अपने जिम्मेदारी समझते हुए इस्तीफा दे दिए हैं लेकिन इनके सरकार में किसी भी मंत्री में अभी तक इस्तीफा का पेशकश तक नहीं कीये। जैसा नीट का पेपर लीक हुआ है उनके मंत्री ने इस्तीफा का पेशकश नहीं किया। पेट्रोलियम मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। जैसे तैसे सरकार चल रहा है और उनकी आलोचना करने वाले भी नहीं है इन्होंने आलोचना करने वालों को रोक दिया है,और सरकार अपने मनमर्जी से चला रहे हैं। इनके सरकार नीति निर्माण में बिल्कुल फेल हुए हैं, रुपया तभी कमजोर होता है जब आप विदेश से आयात ज्यादा करते हैं और निर्यात कम होता है। यूपीएस सरकार के समय रुपया ₹60 के करीब था आज ₹100 पर करने को है, पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से बात करेंगे तो अब तक कम से कम₹36 इनके 12 साल के कार्यकाल में हो गया,, जबकि यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में मात्र ₹12 बढा था,, यानी आप 12 साल में अब तक कार्यकाल में क्या किया कि आपका कार्यकाल में रुपया₹100 के करीब होने वाला है, फिलहाल सोना नहीं खरीदने पेट्रोल डीजल का संयम से इस्तेमाल करेंगे और रासायनिक खाद का उपयोग कम करेंगे, लेकिन यही करना था तो 2014 में आप शुरू कर देते, खुद भारत सरकार के मंत्री और उनके सरकार के मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल में फिजूल खर्ची करते रहे। अभी जो कर रहे हैं 2014 से ही शुरू कर देते तो कम से कम डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर रहता है। अपने देश के आयात कम करके निर्यात की और आगे बढ़ते तो ऐसा दिक्कत नहीं होता। आपके विदेशी मुद्रा भंडार बिल्कुल संकट में है और संकट के समय अपने नेताओं का गाड़ियों का काफिला कम करने का फोटो वीडियो शेयर कर रहे हैं, कुछ लीटर पेट्रोल डीजल बचा करके कितना फायदा होगा। यह तो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। एवं जनता से यह अपील कर रहे हैं, विदेश यात्रा न करें रेलवे एवं मेट्रो का इस्तेमाल करें। जनता को बंधन में क्यों कर रहे हैं अगर आपके पास पेट्रोल डीजल के पर्याप्त स्टार्ट है, ईरान इजरायल और अमेरिका का युद्ध का बहाना केवल है। देश के जनता को पेट्रोल डीजल जितना भी महंगा पड़े आप डॉलर के मुकाबले खरीद करके आपके पास विकल्प रुस से भी है । रासायनिक केमिकल खांड़ी के देशों से आ सकता है। रसोई गैस भी आ सकता है मिल सकता है लेकिन आप खरीद नहीं पा रहे हैं खरीदने की हिम्मत नहीं हो रही है केवल अमेरिका के दबाव के कारण आखिर भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है उस पर अमेरिका क्यों दबाव बना रहा है किस लिए दबाव बना रहा है यहां का नीति निर्देशक अमेरिका तय कर रहा है आखिर भारत आजाद है या अमेरिका का गुलाम है यह सवाल उठ रहा है। आपकी सरकार के लोग भारत विश्व गुरु की ओर बढ़ रहा है यह किसको एहसास होगा कि भारत विश्व गुरु की ओर बढ़ रहा है। भारत के संस्कृति और उसका धरोहर को आप अमेरिका के आगे गिरवी रख दिए। ऐसा ही रहा तो किसानों पर भी संकट होगा उत्पादन घटेगा महंगाई काबू से बाहर हो जाएगी। उनकी सरकार का जो आलोचना कर रहा है उनके समर्थक लोग कहते हैं देशद्रोही बिल्कुल उनके सरकार को आलोचना करना उनके हिसाब से देशद्रोही है लेकिन इनके सरकार लोग अमेरिका के आगे अपना सब चीज गिरवी रख दिए हैं वह क्या है? खुद सरकार में आने के बाद दुनिया भर के देश का दौरा किये। इसमें देश का रुपया बाहर नहीं गया होगा। यहां से रुपया को गिरते हुए देख करके विदेशी निवेशक देश छोड़कर के भाग रहे हैं। भारत के लोगों को आप लोग कहते हैं आत्मनिर्भर बनेंगे भारत के लोगों के किसानों को दलहन का उत्पादन के लिए और कुछ विकास नहीं किया दलहन और तिलहन भारत में अगर होता है तो आप तेल को आयात करते हैं वह आयात कम होता है। आप खाने का तेल का कम इस्तेमाल करने के लिए नहीं कहते। कपड़ा के व्यापार के मामले में बांग्लादेश भारत से आगे हो गया है। भारत का पूरा सामान चीन से आता है चाहे आप मोबाइल सेक्टर की बात करें। भारत में उत्पादन होने वाला दूध भी महंगा हो रहा है दूध तो विदेश से नहीं आता है लेकिन इसका फर्क तो पड़ेगा ही। भारत की अर्थव्यवस्था बर्बादी की ओर ला दिए पहले कहते थे तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है लेकिन यह झूठा साबित हो गया। 12 सालों में मेकिंग इंडिया के नाम पर क्या किये। यह कोई पूछने वाला नहीं है।
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