श्री गुरु ग्लोबल टाइम:-इस साल नवंबर 2025 बिहार में विधानसभा चुनाव होना है, और बिहार को ज्ञान की धरती गौतम बुद्ध की धरती के ऐतिहासिक विरासत के साथ जाना जाता है। 17 सितंबर प्रधानमंत्री मोदी अपने जन्मदिन पर अपने मां के पिंडदान करने आ रहे हैं गयाजी में। गया जी बोधगया के नाम से भी प्रसिद्ध है बौद्ध स्थल भी वहां है। किसी भी कार्यक्रम को राजनीति इवेंट में बदलना कोई प्रधानमंत्री मोदी से सीखे जब मई के महीने में लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री चुनाव कार्यक्रम में व्यस्त थे तब उनके छोटे भाई ने बनारस गंगा नदी में के दशामेंव घाट में उनके माताजी का पिंडदान कर चुके हैं। उसे समय कई मीडिया चैनल इनकी पुष्टि कर चुका है।यानी प्रधानमंत्री मोदी राजनीति करने के लिए अपने स्वर्गवासी माताजी का भी मदद ले रहे हैं यानी बिहार चुनाव में जनता के बीच मां के नाम पर मनोवैज्ञानिक दबाव के साथ-साथ कुछ लॉजिक का उम्मीद कर रहे हैं।उनसे वोट की उम्मीद कर रहे हैं। 11 साल से केंद्र में सरकार में है और बिहार में 20 साल से सरकार में है विकास के नाम पर अपने उपलब्धि के नाम पर वोट की उम्मीद अब नहीं दिखाई दे रही है, देश में बेरोजगारी महंगाई, बढ़ते अपराध भ्रष्टाचार बहुत बड़ा मुद्दा है , एक तरफ सरकारी कार्यालय में अलग-अलग स्कूलों में भाजपा शासित कई प्रदेशों में मां के नाम पर पेड़ भी लगाना भी एक प्रकार का राजनीतिक इवेंट की तरह हुआ है। बिहार में बीजेपी के समर्थन से चल रही 20 साल से एनडीए के सरकार हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग कि गलत नीति से जनता के सामने (वोट चोर गद्दी छोड़) वोट अधिकार यात्रा राहुल गांधी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने निकाला। लेकिन चुनाव आयोग लोकतंत्र संविधान के हिसाब से काम नहीं करते दिखाई दे रही है बिल्कुल सरकार के पक्ष में काम कर रही है सरकार के दबाव में काम कर रही है ऐसा जनता को भी एहसास हो चुका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपूरा विधानसभा सीट पर एक लाख से अधिक फर्जी वोट के आंकड़े दिए आंकड़े सार्वजनिक किए लेकिन चुनाव आयोग ने उस पर किसी भी प्रकार का जांच के आदेश नहीं दिए अपने गलती नहीं माना। एवं माननीय सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को वोटिंग सुधार कार्यक्रम (SIR)में आधार कार्ड को भी जोड़ने का आदेश दिया। लगभग चुनाव आयोग ने 65 लाख वोट काट दिए थे। चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में केंद्र की एनडीए सरकार अपने पूरे कार्यक्रम करने के बाद चुनाव आयोग उनके हिसाब से चुनाव की कार्यक्रम तय करती है ऐसा भी इस समय लोकतंत्र और संविधान के कार्यक्रम और राजनीति में बिल्कुल दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था होकर के जनता के बीच निष्पक्ष छवि खो चुकी है यह देश के लिए दुर्भाग्य की बात है आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। अब केवल एनडीए सरकार को चुनाव में हारना लोकतंत्र और संविधान की जीत की तरह होगी। बिहार के गया में फनगु नदी के किनारे भगवान राम और सीता ने अपने पिता दशरथ का पिंडदान किया था, प्रधानमंत्री मोदी अपने माता जी का पिंडदान करेंगे अब देश से उम्मीद है जाति धर्म सांप्रदायिकता की राजनीति राम के नाम पर राजनीति देश से समाप्त हो जाए यानी उनका भी पिंडदान उनके हाथों हो जाए यही उम्मीद अब दिखाई दे रही है।
