श्री गुरु ग्लोबल न्यूज:-प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएम जनमन) प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाअभियान में ठेकेदार किस तरह कार्य में गड़बड़ी घोटाला करते हैं। यह रोड भी बाफना कंस्ट्रक्शन दुर्ग को ठेका दिया गया है। जिसका ग्राम पीएम जनमन रोड (घटकर्रा )में भी रोड उखड़ने लगी थी निर्माण कार्य के दौरान यह समाचार भी सब ने देखा है। रवेली जरगांव खपरापारा रोड भी अभी से डामर में दरारें रोड धसने एवं डामर उखड़ने शुरू हो गए हैं। बोर्ड में भारत सरकार द्वारा वित्तीय प्रेषित लिखा है। और कार्य का देखरेख कार्यपालन अभियंता गरियाबंद छत्तीसगढ़ लिखा है। लेकिन यह विभाग वाले किस प्रकार का ठेका देते हैं इसका मूल्यांकन कैसे करते हैं यह जनता का समझ से बाहर है।
मुख्यतः सूचना पटल में चार बिंदु है।
पहले बिंदु मिट्टी(मुरम)3691घन मीटर कार्य 217 टृक मिट्टी डालना है। भारत सरकार वित्तीय प्रेषित करने वाले मिट्टी का कितना मूल्य लगाए होंगे। क्योंकि मिट्टी तो रोड के बगल से तालाब से उठाया गया उनका चैन माउंटेन और जेसीबी हाईवा वाला लगा था। एक ट्रक का मूल्यांकन अगर 1000₹ करेंगे तो 2लाख17हजार होगा, यह भी मूल्यांकन यहां के हिसाब से वहां के खर्च हिसाब से डीजल खर्च के हिसाब से ऑपरेटर खर्चे के हिसाब से बहुत ज्यादा है।
दूसरा बिंदु है दानेदार उप आधार मेटल जीएसईबी जिसको (क्रेशर गिट्टी) भी कह सकते हैं। 683 घन मीटर 41 ट्रक के संमतुलय मंदिर हसौद (रायपुर )से गिट्टी आता है, सामान्य आदमी घर ढलाई के लिए तो ₹20हजार में फ्रेश गिट्टी आ जाता है। लेकिन इसका भी मूल्यांकन 20हजार से करेंगे लगभग 8 लाख₹20000 का होगा।
तीसरा बिंदु गिट्टी परत (डबलू एम एम) जो छोटा गिट्टी होता है बाजरी के समान इसका भाव कम होता है फ्रेश गिट्टी से कम होता है लेकिन इसका भी ₹20हजार प्रति ट्रकजोड़ेंगे । 652 घन मीटर 38 ट्रक लगभग 7 लख रुपए।
अब चौथ बिंदु डामर वाला परत (एम एश ) मोटा डामर परत फिर पतला डामर परत जिसमें सूचना पटल पर नोट ट्रक लिखा है एक ट्रक का₹50हजार भी मूल्यांकन करेंगे उससे तो भी 4लाख 50हजार रुपए का होता है।
सभी बिंदुओं को गणना करेंगे तो टोटल मटेरियल खर्च लगभग 20 लाख रुपए होता है। लगभग 42लाख रुपए में ठेका दिया गया है। फिर 4 लाख40 हजार 5 साल के गारंटी के लिए किस्त रूप में भुगतान के लिए और लिखा गया है सूचना पटल में। कुल मिलाकर समझे तो लगभग1 किलोमीटर के रोड में कार्यपालन अभियंता की देख-रेख में ठेकेदार को शुद्ध 20 से 25 लाख रूपए बच रहा है। यहां तक की इसी रोड में नजदीक की नदिया से रेत (बालु) से पूरा ही (सी सी )रोड निर्माण कर लिया। उसका भी भारत सरकार ने वित्तीय प्रेषित किया है। रेत का मूल्य कितना लगा है लगाया होगा और ठेकेदार सस्ता भाव में गांव की नदिया से उपयोग करके बनाया यह इसमें भी ठेकेदार का पैसा बचता है। यह सब कार्यपालन अभियंता गरियाबंद के देखरेख में बचाया। मतलब सारांश में समझे तो भारत में और पूरे सरकारी काम ठेका से होता है और ठेका का जो खर्च है एस्टीमेट है बढ़ाकर बनाया जाता है, कहते हैं कई बड़े कार्य सरकार कर्ज लेकर करती है मतलब इसी प्रकार कहते हैं कर्ज लेकर के घी पीना केवल ठेकेदार को और इससे जुड़े हुए लोगों को बस फायदा पहुंच रहा है। और सरकार अपने लापरवाही से अपने ऊपर कर्ज बढ़ा रही है और बोझ जनता को पढ़ रहा है।और रोड निर्माण भी इतना पैसा लगने के बाद भी घटिया निर्माण हो रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है वित्तीय प्रेषित भारत सरकार करती है उनके लोग मूर्ख नहीं है एवं कार्यपालन अभियंता के कर्मचारी धन की मुर्ख नहीं है सबको पता है कितना मूल्यांकन में समान मटेरियल लागत लगती है और ठेकेदार को कितना पैसा बचता है यह सब चीज सबको पता होती है सब जानते हुए सब बोर्ड में लिखने के बाद भी सबको अंधेरे में रखते हैं। गिट्टी डामर बजरी का भाव आम जनता सबको पता होता है लेकिन मिट्टी और मुरूम और रेत में यह लोग कितना पैसा मूल्यांकन विभाग वाले कितना में करते हैं यह किसी भी ठेका में किसी भी में पूर्ण जानकारी पब्लिक नहीं देते हैं। और गड़बड़ी इसी में होती है। इसी में पैसा बचता है लाखों करोड़ों बचता है चाहे छोटा 1 किलोमीटर का रोड निर्माण देख लो या 100 किलोमीटर का रोड यह सब का एक उदाहरण
है।
