श्री गुरु ग्लोबल टाइम: कल जो सुप्रीम कोर्ट में हुआ,, पूरे देश में स्पष्ट हो गया है भारत का जो सुप्रीम कोर्ट है जिसको माननीय सुप्रीम कोर्ट कहते हैं वह माननीय नहीं रहा,, जैसे वर्तमान सरकार ने बड़े-बड़े लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को मैनेज कर लिया है वैसे सुप्रीम कोर्ट भी मैनेज हो चुकी है,, गुस्सा स्वाभाविक है,, पहले सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले पर स्वत संज्ञान ले लेती थी अब सुप्रीम कोर्ट का स्वत संज्ञान लेने का औकात और हैसियत नहीं रहा,, उदाहरण के लिए जैसे संसद में एक मुस्लिम सांसद को एक भाजपा के सांसद ने भारी संसद में गाली दिया उसको जो शब्द प्रयोग किया उसको तो मीडिया में नहीं लिख सकते, पूरे भारत देश में और पूरी दुनिया में वायरल हुआ,, उसे समय सुप्रीम कोर्ट ने क्यों से संज्ञान नहीं लिया,, भाजपा के एक मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट को सीधा कहा अपनी औकात में रहे,, सुप्रीम कोर्ट खुद औकात में हो गई है,, लोकतंत्र के तीन तीन स्तंभ है व्यवस्थापिका कार्यपालिका और न्यायपालिका,, न्यायपालिका बिल्कुल स्वतंत्र है लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार के नीति और नियम देखें तो न्यायपालिका अब स्वतंत्र नहीं है,, चाहे वोटिंग SIR का फैसला चाहे बिहार का हो या बंगाल का चुनाव से जस्ट पहले,, सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह मामला को टलता गया चुनाव नहीं पड़ गया कई लोगों का वोटिंग से नाम कट गया,,, सुप्रीम कोर्ट पर अब देश का भरोसा नहीं रहा,, सरकार गलती करती है तो सर्वोच्च न्यायालय न्याय करती है लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट का खुद न्याय करने का हैसियत भारत में नहीं रहा,, पूरे देश में स्पष्ट हो गया है लोकतंत्र की गरिमा और व्यवस्था को खुद सुप्रीम कोर्ट ने बर्बाद किया है,, जो सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश होता है,, जो भारत के राष्ट्रपति को शपथ दिलाता है,, क्या उसका यही है हैसियत है, जिसको आज भर कोर्ट में गाली पड़ रहा है,, पूर्व चीफ जस्टिस को कोर्ट के सामने उसको ऊपर जूता उछाला गया,,, देश के किसी भी हाईकोर्ट में स्वतह: संज्ञान नहीं लिया,,, सुप्रीम कोर्ट खुद कई जनहित में मुद्दे देखे तो 2014 के बाद ईडीसीबीआई का दुरुपयोग,, संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग इस पर चुप्पी साथ लेती है,, देश का गुस्सा जायज है,, देश में राम मंदिर पर जो चढ़ना चोरी पर मामला आया है, सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा अगर अभी फैसला नहीं करेंगे तो पहाड़ नहीं टूट जाएगा,,,, सुप्रीम कोर्ट कई ऐसी टिप्पणी आया है जो 2014 के बाद आया है,, देश का भरोसा सुप्रीम कोर्ट ने खो दिया है,,, सुप्रीम कोर्ट जो वर्तमान सरकार के नियंत्रण में हो चुकी है उनसे मैनेज हो चुकी है पूरे देश को स्पष्ट दिखाई दे रहा है,, जो आजादी के अब तक नहीं हुआ जो हो गया है,, न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन न्यायपालिका अब स्वतंत्र नहीं रहा पूरे देश में स्पष्ट हो गया है। सरकार सट्टा आती जाती रहती है सुप्रीम कोर्ट से ऊपर जनता की अदालत है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट जनता की अदालत पर विश्वास नहीं कर रही है, देश के सांसद और विधायक खरीदे जा रहे हैं, कई राजनीतिक पार्टी टूट रही है उसको खरीदा जा रहा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनता की अदालत से वर्तमान सरकार के पक्ष में दे रही है यह तो खुद सुप्रीम कोर्ट अन्याय कर रही है अगर सुप्रीम कोर्ट अन्याय करेगी तो गुस्सा जायज है चाहे मामला जो भी हो। देश के जनता के साथ जो धोखाधड़ी हो रहा है,, वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का दुरुपयोग कर रही है उसे पर खुद सुप्रीम कोर्ट अपना आंखों का पट्टी बांध लिया है पहले स्वतह:संज्ञान लेती थी अब लेने का हैसियत नहीं रहा पूरे देश में स्पष्ट हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट की अब सुप्रीम कोर्ट वाला हैसियत नहीं रहा ।
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