श्री गुरु ग्लोबल टाइम:-भारत सरकार के निर्देशानुसार अब राज्य सरकार भी पालन करते हुए। एक हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले किसान को जो प्राथमिक (BPL)राशन कार्ड से जुड़े हैं जिनको उनको सीधे (APL)किया जाएगा। लेकिन फिलहाल केवल 5 एकड़ से अधिक वाले किसानों का राशन कार्ड को करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आज घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को जो छुट दे रही थी उसको कम किया अब सीधे प्रभावित हो रहे हैं लेकिन फिलहाल किसानों को छूट मिल रही है बिजली में क्या इसको भी समाप्त कर देंगे सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग किसानों को पर एचपी ₹100 बिल आता है, ST\SC किसानों को जीरो बिल आता है, क्या इसको भी राज्य सरकार केंद्र सरकार बंद कर देगी अब किस मुख्य धारा में आ चुके हैं ऐसा कहकर एपीएल अमीरी रेखा पार चुप कर चुके हैं ऐसा आंकड़े देकर के कृषि उपभोक्ता बिजली सब्सिडी क्या बंद कर देगी?जो जनगणना 2021 में होनी थी अभी तक नहीं हुई है 2026 में होगी। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार रोककर रखी थी। लेकिन अब तो जाति जनगणना होगी। किस वर्ग के लोग कितने सरकारी नौकरी में हैं कितने भूमिहीन है कितने इनकम टैक्स के दायरे में है। और कितने जाति के लोग मुख्य धारा में आ चुके हैं यानी सामान्य रेखा में आ चुके हैं। यह सब 2026 में होना है। लेकिन उससे पहले राज्य सरकार अपने स्तर पर उसका कार्य पहले से तैयारी कर चुकी है उसी का बस अब पालन हो रहा है। देश में 80 करोड लोग ऐसे हैं जो राशन ले रहे हैं। लेकिन देश की कुल आबादी कितनी है यह परफेक्ट आंकड़ा सरकार के पास भी नहीं है। केंद्र की मोदी सरकार अपने 11 वर्ष पूरा कर चुकी है। उनको भी अपना प्रोग्रेस रिपोर्ट दिखाना है। गरीबी रेखा से कितने परिवार को सामान्य किए हैं। एवं मुख्य धारा में लाए हैं। कहने का मतलब कितने लोग आत्मनिर्भर बन गए हैं। 13 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार के भी 2 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे उनको भी अपनी उपलब्धि दिखाना है। लेकिन क्षेत्र की जनता बिजली बिल की बेतहाशा बढ़ोतरी से पहले से नाराजगी है। किसान वर्ग खाद की कालाबाजारी महंगे दाम में खाद खरीद कर आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। पब्लिक के पास जो पैसा बचाना चाहिए नहीं बच पा रहा है इससे अर्थव्यवस्था भी खराब होती है। सीधा असर बाजार पर पड़ता है। बाजार में समान कम बिकते हैं। हालांकि सरकार जीएसटी कम किया है करके वह वहावाही कर रही थी। लेकिन अभी भी जीएसटी कम का सीधा बाजार पर असर दिखाई नहीं दे रहा है। लेकिन केंद्र सरकार और राज्य सरकार का वह मानना बिल्कुल सर्वमान्य है कई बीपीएल एपीएल उपभोक्ता राशन से मिलने वाले चावल का उपयोग नहीं करते उसको बाजार में बेच देते हैं और पतला चावल खरीद लेते हैं। लेकिन इसको रोकने के लिए सरकार के पास बेहतर पॉलिसी नहीं है। ना खाद्य विभाग के पास है। अगर खाद्य विभाग राइस मिलर से मिल करके कम करें जो सीधे राशन दुकानों में चावल मिलता है। उसकी पहचान करने के लिए कुछ एक प्रतिशत चावल में कलर मिलाया जाए कलर चावल किया जाए और ऐसे चावल को किसी दुकान में खरीदने पर बैन लगा दे तो यह चीज आसानी से रख सकती है। और ऐसे सब्सिडी में चावल खरीद करके बाजार में बेचने वाले उपभोक्ता पर उचित कार्रवाई करें तभी यह समस्या दूर हो सकती है। सरकार महंगा में चावल खरीद करके नियत राशि में उपभोक्ता को देती है। लेकिन राशन कार्ड को बीपीएल से एपीएल करने में पब्लिक में विचार का विषय बन गया है।क्या फिर उनको बीमार पड़ने पर जो उनको सहायता मिलती है गरीबों को एपीएल होने के बाद क्या नहीं मिलेगा। लेकिन शासन ने राशन कार्ड में महिला मुखिया बना दिया है और महिला मुख्य के पास जमीन बहुत कम है लेकिन उनके पति के पास है तो क्या उनके पति का नाम बीपीएल से काटा जाएगा या सबका कट जाएगा। यह सबसे बड़ा सवाल है। लेकिन मूल्यांकन वार्षिक आए से होती है। ढाई एकड़ या 5 एकड़ जितने भी किसान है इसका आत्मनिर्भर देखें तो चावल खरीदने तक तो सक्षम है लेकिन अन्य मूलभूत आवश्यकताओं के लिए आर्थिक स्थिति का संकट बिल्कुल खड़ा हो जाएगा। 5 एकड़ का किसान और सरकारी नौकरी वाला चपरासी से बेहतर आर्थिक स्थिति तो चपरासी का रहता है। लेकिन सरकार तो ढाई एकड़ को मुख्य धारा समझ रही है। लेकिन कई ऐसे किसान है जिनके पास तो बहुत जमीन है लेकिन पड़त भूमि है उतनी आमदनी नहीं होती। धान का फसल उस भूमि नहीं होती। क्या ऐसे लोगों का राशन कार्ड एपीएल हो जाएगा। अब ऐसे लोगों का कितने लोग एपीएल में आते हैं कितने लोग मुख्यधारा में सरकार के हिसाब से आंकड़े के हिसाब से आ जाएंगे या तो खैर भविष्य का विषय है।
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