Shri Guru global time :-सरकार किसी राजनीतिक दल या संगठन का रहे सरकारें ब्यूरोक्रेसी यानी अधिकारी कर्मचारी चलाते हैं, सरकार का आयु 5 साल होती है लेकिन जो ब्यूरोक्रेसी है वह कई साल तक सेवा (सर्विस )में रहते हैं। ऐसे शिविर सुशासन सप्ताह भाजपा कांग्रेस दोनों में देखे होंगे सरकार बदलती है मंच पर बैठे चेहरे एवं विधायक मुख्यमंत्री ही बदलते हैं सरकारी पोस्टर का चेहरा बस बदलता है ,अधिकारी वहीं रहते हैं वही अधिकारी कर्मचारी जो एक दूसरे स्थान से ट्रांसफर होकर के आए रहते हैं लेकिन उनका कार्यकाल वैसा ही रहता है जैसे जिस क्षेत्र में रहे हो। यानी सरकारी कर्मचारी ब्यूरोक्रेसी पब्लिक के सेवक होते हैं, इनका मासिक भुगतान मिलता है। अगर वह पब्लिक का काम ना करें तो नुकसान केवल जो सरकार में है जन प्रतिनिधि है विधायक है या अन्य पद पर है नुकसान सीधा उन्हीं को होता है अधिकारी कर्मचारी का कुछ नहीं बिगड़ने वाला। जिला गरियाबंद अंतर्गत जनपद पंचायत छुरा के अंतर्गत सुशासन सप्ताह का शिविर श्री गुरु ग्लोबल टाइम संपादक गोल्डन यादव भी वहां कार्यक्रम में गए थे। हम पब्लिक की तरह अपना आवेदन देने गए थे आवेदन लगभग 22 दिसंबर को 2:30 बजे जिनका श्री गुरु ग्लोबल टाइम में फीचर इमेज लगा है कर्मचारियों को आवेदन दिए कर्मचारियों ने आवेदन देने का टाइम समय समाप्त हो गया है करके आवेदन लेने से इनकार कर दीया। फिर हमने अपना आवेदन नहीं दिए वापस जा रहे थे फिर किसी और ने बगल में थे उन्होंने बुलाया और आवेदन लिया और जो सामने वह कर्मचारी था वह हमसे बोला आवेदन तो ले लेंगे लेकिन निराकरण नहीं होगा। फिर वह कर्मचारी कई ऐसे लोगों से आवेदन लेने का समय नहीं है करके आवेदन नहीं ले रहा था,फिर हमने मंच पर यह समस्या बताया फिर जितने भी आवेदन है उसको वह सब आवेदन ले रहे थे। लेकिन हमने दोनों सरकारों को देखा है दोनों सरकार डिजिटल दुनिया में होने के बाद भी दुनिया भर के टेंट में नाश्ता में चाय पानी में वांहन में पेट्रोलिंग में डीजल में अन्य साफ सफाई में दुनिया भर के पैसा खर्च करती है। जब किसान ऑनलाइन धान बेचने का टोकन कट सकते हैं ऑनलाइन आवेदन क्यों नहीं हो सकता। ऑनलाइन निराकरण क्यों नहीं हो सकता इसमें तो कम खर्च है। लेकिन अभी भी ऑनलाइन आवेदन होता है। लेकिन ऑनलाइन आवेदन का आंकड़ा केवल इन अधिकारी सरकारी ब्यूरोक्रेसी के पास ही रहता है। अगर ऑनलाइन आवेदन ऑनलाइन समस्या का किसका निराकरण हुआ किसका नहीं हुआ इसको अगर सार्वजनिक कर देंगे कोई भी आदमी नागरिक देख सकता है तो सरकार कांग्रेस का हो या बीजेपी का पोल खुद सरकार का खुल जाएगा। इसलिए ब्यूरोक्रेसी अधिकारी कर्मचारी ऐसा जोखिम नहीं ले सकते। कहने का मतलब सरकार किसी का भी रहे सरकारी ब्यूरोक्रेसी चलाती है। यानी जो पद पर है विधायक हैं मंत्री हैं उन्हीं को उलझा कर रखते हैं यह अधिकारी कर्मचारी उन्हें को मूर्ख बनाते हैं जो पद पर हैं। और जनता जो पद पर है उन्हीं को दोषी मानती है ना कि ब्यूरोक्रेसी को। इसका खामियाजा जो सरकार में है जो सरकार चला रहे हैं आने वाला चुनाव में इलेक्शन में जनता उन्हीं को हटा देती है लेकिन ब्यूरोक्रेसी वहीं रहते हैं। उनको तो नहीं हटा सकते। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार का 2 साल का कार्यकाल देखें सरकार को लगता है जो शासन में बैठे हैं उनको लगता है सरकार धान खरीदी और महतारी बंदन योजना में अच्छा काम कर रही है उनको अच्छा फीडबैक मिल रहा है। लेकिन जमीन स्तर पर ऐसा नहीं है। जो विवाहित महिलाएं हैं नए को सरकार नहीं जोड़ रही है। एवं वन पट्टा में कई ऐसे किसान है वह धान बेंचने से वंचित है। एवं एग्रीस्टेक पोर्टल में कई किसानों का रकबा में कटौती हुआ है। एवं राजस्व विभाग में सीमांकन बटांकन बटवारा नक्शा सुधार राजस्व के कई प्रकरण अधूरे हैं। किसानों को धान बेचने के लिए तहसील कार्यालय बहुत खर्च इधर-उधर दौड़ धूप करना पड़ रहा है। परेशानी बढ़ रही है। बेतहाशा बिजली बिल बढ़ोतरी की समस्या सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं होने की समस्या स्कूलों में शिक्षकों की समस्या आवास का अंतिम किस्त कई हितग्राही को नहीं मिला है। दूसरा पक्ष पंचायत को नया कार्य नहीं मिल रहा है। एवं खेती किसानी संपन्न होने के बाद कई मजदूर वर्ग काम नहीं है मनरेगा के अंतर्गत जिसका नाम बदल गया है उसमें नया काम अब नहीं मिल रहा है सरकार कब तक नया काम शुरू करेगी कोई दूर दृष्टि नहीं दिखाई दे रही है। वर्तमान में अगर तुलना करेंगे जो सरकार से नाराज मतदाता है उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। अगर छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीट है। अगर पक्ष और विपक्ष की तुलना करें हार जीत का अंतर 15 ऐसी विधानसभा सीटे हैं। जो हार जीत का अंतर 5 से 10 हजार मत का रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में। तो सरकार तो ऐसे ही बदल जाएगी। क्या वर्तमान भाजपा सरकार कुछ विधायकों का टिकट को बदल करके नया उम्मीदवार करके या मंत्रियों में नेहरा नया चेहरा ला करके फिर वापस सत्ता में लौट सकती है यह सबसे बड़ा सवाल है इसका उत्तर तो केवल जनता के मन में है। लेकिन हमने यही देखा वर्तमान सरकार से जनता में बहुत नाराजगी बढ़ रही है। आने वाला समय में यह अच्छा नहीं हुआ तो सरकार बिल्कुल बदल सकती है और इनका सबसे बड़ा दोषी वर्तमान सरकार के ब्यूरोक्रेसी पर आएगा जो काम सही नहीं कर रही है। लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है पर भाजपा सरकार के ब्यूरोक्रेसी जनता का मालिक बन गए हैं भाजपा सरकार में ब्यूरोक्रेसी नियंत्रण में नहीं है यानी सरकार ब्यूरोक्रेसी ही चला रहे हैं जनप्रतिनिधि का कोई बड़ा रोल बड़ा भूमिका नहीं दिखाई दे रही है। भाजपा सरकार कुछ नया नहीं कर रही है जिसमें पब्लिक का लोकप्रियता बढ़े क्या चुनाव के 1 साल पहले अच्छे से कार्य करेगी?
बीजेपी कांग्रेस ब्यूरोक्रेसी का चाटुकार पत्रकार कभी नहीं लिख पाएगा ऐसा समाचार।
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